बोध-पुस्तक को पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
1989 के चुनावों के बाद भारत के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया, जिसने कांग्रेस के प्रभुत्व में गिरावट को चिह्नित किया। हालाँकि कांग्रेस अभी भी लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन उसके पास स्पष्ट बहुमत नहीं था, जिसके कारण उसे विपक्ष में बैठना पड़ा। जनता दल और अन्य क्षेत्रीय दलों के गठबंधन नेशनल फ्रंट ने भाजपा और वाम मोर्चे के समर्थन से सरकार बनाई। हालाँकि, इनमें से कोई भी सहयोगी दल सरकार में शामिल नहीं हुआ।
1989 में कांग्रेस की हार ने उसके प्रभुत्व की समाप्ति का संकेत दिया, जिसे उसने 1960 के दशक के अंत में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में पुनः प्राप्त किया था। 1990 के दशक में, कांग्रेस को अपने प्रभुत्व के लिए एक और चुनौती का सामना करना पड़ा, लेकिन कोई भी एक पार्टी उसकी जगह लेने के लिए उभरी नहीं। 1989 से 2014 तक के दौर में गठबंधन सरकारों का उदय हुआ, जिसमें क्षेत्रीय दलों ने गठबंधन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2014 और 2019 के चुनावों में एक पार्टी के बहुमत की वापसी हुई, क्योंकि भाजपा ने अपने दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
1996 में, कांग्रेस और वाम मोर्चे के समर्थन से संयुक्त मोर्चा, एक गठबंधन सरकार सत्ता में आई। भाजपा के एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरने के बावजूद, नब्बे के दशक की गठबंधन राजनीति ने भारतीय राजनीति की अस्थिरता और बदलती निष्ठाओं को उजागर किया। भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 1998 में सरकार बनाई, जिसके प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे। इस अवधि ने भारत में गठबंधन राजनीति की शुरुआत को चिह्नित किया, जो 2014 के चुनावों तक जारी रहा जब भाजपा ने अपने दम पर बहुमत हासिल किया।
1996 में सत्ता में कौन सी गठबंधन सरकार आई थी?