दिए गए परिच्छेद को ध्यान से पढ़ें और इसके आगे आने वाले पाँच प्रश्नों के उत्तर दें।
कुटीर उद्योग निर्माण की सबसे छोटी इकाई है। इसमें शिल्पकार स्थानीय कच्चे माल का उपयोग करते हैं एवं साधारण औज़ारों द्वारा परिवार के सभी सदस्य मिलकर या अंश-कालिक श्रमिकों की सहायता से अपने दैनिक जीवन के उपभोग की वस्तुओं का उत्पादन करते हैं। तैयार माल या तो वे स्वयं उपभोग करते हैं या इसको स्थानीय (गाँव) बाज़ार में विक्रय कर देते हैं। पूँजी और परिवहन का इस प्रकार के उद्योगों पर ज्यादा प्रभाव नहीं है क्योंकि इनके द्वारा निर्मित वस्तुओं का व्यापारिक महत्त्व कम होता है और अधिकांश औज़ार स्थानीय रूप से तैयार किए जाते हैं। निर्माण के इस क्षेत्र में उत्पादित कुछ सामान्य रोज़मर्रा के उत्पादों में खाद्य पदार्थ, कपड़े, चटाइयाँ, कंटेनर, औज़ार, फर्नीचर, जूते और जंगल से लकड़ी की लघु-मूर्तियाँ, जूते, थोंग्स ( thongs) और चमड़े से निर्मित अन्य सामान, मिट्टी के बर्तनों और मिट्टी और पत्थरों से बनी ईंटें शामिल हैं। सुनार सोने, चाँदी और काँस्य के आभूषण बनाते हैं। कुछ शिल्प की वस्तुएँ बाँस और स्थानीय जंगलों से प्राप्त लकड़ी से बनाई जाती हैं।
छोटे पैमाने के उद्योग को कुटीर (गृहस्थ) उद्योग से अलग इसकी उत्पादन तकनीकों और निर्माण स्थल (उत्पादक के घर से बाहर कारखाना) के आधार पर किया जाता है। इस प्रकार के निर्माण में स्थानीय कच्चे मालों, साधारण ऊर्जा संचालित मशीनों और अर्द्ध-कुशल श्रमिकों का प्रयोग किया जाता है। ये उद्योग रोज़गार प्रदान करते हैं और स्थानीय निवासियों की क्रय शक्ति बढ़ाते हैं। इसलिए, भारत, चीन, इंडोनेशिया और ब्राज़ील जैसे देशों ने अपनी जनसंख्या को रोज़गार उपलब्ध करवाने के लिए इस प्रकार के श्रम सघन छोटे पैमाने के उद्योग प्रारंभ किए हैं।
बड़े पैमाने के उद्योग के लिए विशाल बाज़ार, विभिन्न प्रकार के कच्चे माल, अत्यधिक शक्ति के साधन, कुशल श्रमिक, विकसित प्रौद्योगिकी, अधिक उत्पादन एवं अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है। पिछले 200 वर्षों में यूनाइटिड किंग्डम, संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तर-पूर्वी भाग और यूरोप में इसका विकास हुआ है। वर्तमान में इसका विस्तार विश्व के लगभग सभी भागों में हो गया है।