Comprehension Passage
'प्रदूषणकर्ता को भुगतना पड़ेगा' के सार्वभौमिक नियम के आधार पर, लोगों की भागीदारी से पारिस्थितिकी को बहाल करने और मानव स्वास्थ्य की रक्षा का प्रयास मेरठ के निकट दौराला में हुआ है। तीन साल के अंतराल में मेरठ स्थित एक गैर सरकारी संगठन ने पारिस्थितिकी बहाली का मॉडल विकसित किया था, जिसके बाद अब ये प्रयास रंग ला रहे हैं। दौराला इंडस्ट्रीज के अधिकारियों, गैर सरकारी संगठनों, सरकारी अधिकारियों और अन्य हितधारकों की मेरठ में हुई बैठक के नतीजे सामने आए हैं। सशक्त तर्क, प्रामाणिक अध्ययन और लोगों के दबाव ने इस गांव के बारह हजार लोगों को नया जीवन दिया है। वर्ष 2003 में दौरालावासियों की दयनीय स्थिति ने नागरिक समाज का ध्यान खींचा था। इस गांव का भूजल भारी धातुओं से दूषित था। इसका कारण यह था कि दौराला उद्योगों का अनुपचारित अपशिष्ट जल भूजल स्तर में रिस रहा था। गैर सरकारी संगठन ने गांव के लोगों के स्वास्थ्य की स्थिति का घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया और एक रिपोर्ट तैयार की। संगठन, गांव का समुदाय और जनप्रतिनिधि स्वास्थ्य समस्या के स्थायी समाधान खोजने के लिए एक साथ बैठे। उद्योगपतियों ने बिगड़ती पारिस्थितिकी को रोकने में गहरी दिलचस्पी दिखाई। गांव में ओवरहेड वॉटर टैंक की क्षमता बढ़ाई गई और समुदाय को पीने योग्य पानी की आपूर्ति के लिए 900 मीटर अतिरिक्त पाइपलाइन बिछाई गई। गांव के गाद वाले तालाब को साफ किया गया और उसमें से गाद निकालकर उसे रिचार्ज किया गया। बड़ी मात्रा में गाद को हटाया गया जिससे बड़ी मात्रा में पानी निकल आया और इससे जलभृतों में पानी भर गया। जगह-जगह वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया है जिससे मानसून के बाद भूजल के दूषित पदार्थों को कम करने में मदद मिली है। 1000 पेड़ भी लगाए गए हैं जिससे पर्यावरण में सुधार हुआ है।
दौराला में पारिस्थितिक बहाली के प्रयासों का आधार कौन सा सिद्धांत था?
1
सतर्कतावादी सिद्धांत
2
अंतर-पीढ़ीगत समानता
3
सतत विकास सिद्धांत
4
प्रदूषक भुगतान सिद्धांत