Comprehension Passage
महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन (1920-1922) ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ़ पहले जन आंदोलनों में से एक था। इसने ब्रिटिश वस्तुओं, संस्थाओं और चुनावों का बहिष्कार करने और भारतीय हस्तशिल्प के पुनरुद्धार को प्रोत्साहित करने की मांग की। इस आंदोलन को पूरे भारत से समर्थन मिला, लेकिन 1922 में चौरी चौरा की घटना के बाद इसे स्थगित कर दिया गया, जहाँ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। अपने शुरुआती निलंबन के बावजूद, इस आंदोलन ने सविनय अवज्ञा के बाद के अभियानों के लिए मंच तैयार किया।

 असहयोग आंदोलन के प्रमुख परिणामों में से एक था: 

1
भारतीय स्वतंत्रता की तत्काल उपलब्धि।
2
कठोर दमन के माध्यम से ब्रिटिश सत्ता को सुदृढ़ करना।
3
भारत की ग्रामीण आबादी में राष्ट्रीय मुद्दों के प्रति नई चेतना और जागरूकता।
4
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच गठबंधन की स्थापना।

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