निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन कीजिए।
अधिगम को बहुत प्रभावशाली बनाने के लिए न केवल अधिगम को सुगम बनाने वाले कारकों और तकनीकों का प्रयोग आवश्यक है, वरन् अध्यापकों को कक्षा में ऐसी स्थितियां भी बनानी होती हैं जो अधिगम को बेहतर बनाएं। इन स्थितियों में शामिल हैं अध्यापन सहायक सामग्रियां प्रदान करना, प्रतिस्पर्धा और परस्पर सहयोग की भावना उत्पन्न करना, प्रगति और सफलता का ज्ञान देना, प्रशंसा करना या डाँटना और अधिगम का मार्गदर्शन करना। दृश्य सहायक सामग्रियां अधिगम को मूर्त और अर्थपूर्ण बनाती हैं। आप सिंधु-गांगेय मैदानों की भौतिक विशेषताओं का वर्णन कर सकते हैं, पर चलचित्र, फिल्मस्ट्रिप, मानचित्र, चार्ट, आरेख और चित्र आपके शाब्दिक वर्णन को मूर्त बना देंगे। जब अध्यापन सहायक सामग्रियां प्रयोग की जाती हैं तो शाब्दिक अनुदेश के साथ एक अतिरिक्त अर्थ जुड़ जाता है। ये सामग्रियां बस संपूरक यंत्र होती हैं, अध्यापक जो कर सकते हैं उन चीज़ों का स्थान लेने वाली नहीं। ऐसा माना जाता है कि कुछ विद्यार्थी देख कर सीखते हैं, कुछ सुन कर और कुछ शब्दों से। जो शब्दों से सीखते हैं उन्हें शाब्दिक अनुदेशों के जरिए आसानी से सिखाया जा सकता है, पर बाकियों के लिए दृश्य सहायक सामग्रियां आवश्यक हैं। चाहे उपर्युक्त मान्यता सही हो या नहीं, असल प्रश्न यह है कि विद्यार्थियों में इतना तीक्ष्ण विभेदन किया जा सकता है या नहीं। तथ्य यह है कि अधिगम में जिनते अधिक अंगों का उपयोग होगा, अधिगम संवेदना उतनी ही अधिक प्रभावशाली हो जाएगी। अमूर्त धारणाओं को तब समझना आसान हो जाता है जब उन्हें चलचित्रों या टीवी या ऐसी अन्य अध्यापन सामग्री के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। अनुदेशात्मक सहायक सामग्रियाँ उन वस्तुओं और स्थितियों के विकल्प प्रदान करती हैं जिन्हें कक्षा में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है। दूर-दराज के स्थान पर लगने वाली विज्ञान प्रदर्शनी को विज्ञान कक्ष में नहीं लाया जा सकता, लेकिन टी.वी. कार्यक्रम के माध्यम से उसे कुछ ही समय में पूरा देखा जा सकता है।