बाल विकास के समकालीन परिप्रेक्ष्य:

1
बच्चे को एक जैविक प्रवर्ग के रूप में देखते हैं।
2
बच्चे को एक दैहिक के सत्व रूप में देखते हैं।
3
बाल्यावस्था को विशिष्ट चरणों में विभाजित मानते हैं।
4
बाल्यावस्था को एक विशिष्ट सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना मानते हैं।

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