ICICI बैंक लिमिटेड बनाम त्रिशला अपैरल्स प्राइवेट लिमिटेड (2015) में, मद्रास उच्च न्यायालय ने समय द्वारा वर्जित वादों के संबंध में क्या जोर दिया? (परिसीमा अधिनियम)
1
न्यायालय को समय की कमी के बावजूद वादों पर विचार करने का विवेकाधिकार प्राप्त है, चाहे विरोधी पक्ष की दलील कुछ भी हो।
2
न्यायालय समय-बाधित वादों को खारिज करने के लिए बाध्य नहीं है, जब तक कि विरोधी पक्ष दलील न दे।
3
न्यायालय का यह कर्तव्य है कि वह समय-सीमा से परे वादों को खारिज कर दे, भले ही विरोधी पक्षकार दलील न दे।
4
यदि विरोधी पक्षकार दलील नहीं देता है तो समय से बाधित वादों को अदालत द्वारा खारिज नहीं किया जा सकता है।