किराया क्रय पद्धति के अन्तर्गत, प्रत्येक अवधि के लिये ब्याज की गणना की जाती है
1
भुगतान न हुये रोकड़ शेष के मूल्य पर
2
भुगतान न हुये किश्त मूल्य के शेष पर
3
किराया क्रय के अन्तर्गत समझौता की गयी राशि पर
4
रोकड़ मूल्य में से भुगतान की गयी किराया मूल्य की किश्त घटाकर