निर्देश निम्नलिखित लेखांश को पढ़कर उसके अन्त में दिये गये प्रश्नों का उत्तर दीजिये। प्रश्नों के उत्तर लेखांश पर आधारित होने चाहिए:
जब शरीर में स्थित कोशिकाओं और शरीर के बीच संघर्ष होता है, तो प्राकृतिक चयन साधारणतः शरीर का पक्ष लेता है, जिससे पथभ्रष्ट कोशिकाएँ साधारणतः अनुशासित हो जाती हैं, विशेषतः क्योंकि कोशिकाएँ शरीर के बाहर जीवित नहीं रह सकतीं। इस सिद्धान्त का एक सुपरिचित अपवाद यह है कि कैंसर कोशिकाएँ को ऐसी स्वार्थी कोशिकाओं के रूप में सोचा जा सकता है जो शरीर के लिए लाभप्रद गति से, अधिक तेजी से पुनरुत्पादन का प्रयत्न कर रही हैं। बेशक अन्त में कैंसर कोशिकाएँ व्यक्ति के साथ ही नष्ट हो जाती हैं, परन्तु यह स्पष्ट नहीं होता कि क्यों प्राकृतिक चयन ने कैंसर को पूर्ण रूप से लुप्त नहीं किया। कैंसर कोशिकाओं के स्वार्थी होने के बारे में एक सामान्य आपत्ति यह है कि वह विकृत होती हैं और शायद विषाणुओं से संक्रमित होती हैं, कैंसर एक बीमारी है, इत्यादि । यह सब सत्य है और इस प्रश्न के निकटस्थ उत्तर के लिए उपयुक्त है क्यों कैंसर कोशिकाएँ शरीर के लिए लाभप्रद गति से अधिक तेजी से पुनरुत्पादन करती है। परन्तु परम, विकासपरक उत्तर अनिवार्य रूप से होना चाहिए कि इस मामले में प्राकृतिक चयन व्यक्ति के बजाय, कोशिकाओं के पक्ष में ज्यादा काम कर रहा है।