जब विधि का उल्लंघन करने वाला किशोर जो अभिरक्षा में है, को विचारण के दौरान 18 वर्ष की आयु पार करने पर किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम की धारा 18 (3) के अंतर्गत वयस्क घोषित किया जाता है, उक्त स्थिति में विचारण न्यायालय के पास निम्न में से कौनसा विकल्प उपलब्ध है?

1
बालक को परामर्श अथवा भर्त्सना के पश्चात घर जाने को अनुज्ञात करना।
2
कार्यवाहियों को समाप्त करके बालक को अविलम्ब अभिरक्षा से निर्मुक्त करना।
3
बालक को सदाचरण की परिवीक्षा पर छोड़ने का निर्देश देना।
4
बालक को सुरक्षित स्थान पर भेजना।

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