अभिकथन: किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 20 के अनुसार, यदि किसी बच्चे ने इक्कीस वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है, लेकिन उसने सुरक्षित स्थान पर रहने की निर्धारित अवधि पूरी नहीं की है, तो वे निर्धारित अवधि पूरी होने तक वहां रहना जारी रख सकते हैं।
कारण: किशोर न्याय अधिनियम बच्चों के पुनर्वास और संरक्षण को प्राथमिकता देता है, भले ही वे वयस्कता की आयु पार कर चुके हों।
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अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं, तथा कारण ही अभिकथन का सही स्पष्टीकरण है।
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अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं, लेकिन कारण, अभिकथन का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
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अभिकथन सत्य है, परन्तु कारण असत्य है।
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अभिकथन असत्य है, परन्तु कारण सत्य है।