अभिकथन (A): न्याय दर्शन में स्वार्थानुमान वास्तव में आत्म-समझ के लिए अनुमान से संबंधित है और इसका उद्देश्य दूसरों को संप्रेषित करना नहीं है।
कारण (R): स्वार्थनुमान का उद्देश्य, अनुमान लगाने वाले व्यक्ति के लिए संज्ञानात्मक निश्चितता स्थापित करना है, बिना यह आवश्यक है कि वह दूसरों की सहमति या समझ को जन्म दे।
1
A और R दोनों सत्य हैं, तथा R, A का सही स्पष्टीकरण है।
2
A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
3
A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
4
A असत्य है, लेकिन R सत्य है।