दो फेरों वाली एक वृत्ताकार कुंडली से गुजरने वाली धारा इसके केंद्र पर B चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। कुंडली को फिर से इस प्रकार घुमाया जाता है कि इसमें चार फेरे हों और वही धारा को इससे गुजरती है। अब इसके केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र है:
1
\(2B\)
2
\(\dfrac{B}{2}\)
3
\(\dfrac{B}{4}\)
4
\(4B\)