प्रत्येक अनुप्रस्थ स्टेशन पर चुंबकीय याम्योत्तर की दिशा स्थापित की जाती है और रेखा की दिशा चुंबकीय याम्योत्तर के संदर्भ में निर्धारित की जाती है, चंक्रम (traverse) की इस विधि को निम्न के रुप में जाना जाता है-
1
ढीली सुई विधि
2
तेजी से सुई विधि
3
दिक्मान विधि
4
निश्चित सुई विधि
5
अनुत्तरित प्रश्न