भारत में न्यायिक पुनरावलोकन के संबंध में त्रुटिपूर्ण कथन को पहचानिए :

1
संविधान में 'न्यायिक पुनरावलोकन' शब्दावली का उल्लेख नहीं हुआ है।
2
न्यायिक पुनरावलोकन संविधान के मूल ढाँचे का अंग है।
3
संविधान-संशोधन न्यायिक पुनरावलोकन के  विचार-क्षेत्र में आते हैं।
4
अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपतीय उद्घोषणा न्यायिक पुनरावलोकन के विचार-क्षेत्र में नहीं है, क्योंकि इसे अनुच्छेद 74(2) का संरक्षण मिला है। 

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