बिहार में प्राथमिक शिक्षा का बुरा हाल है। 50 प्रतिशत से ज्यादा स्कूलों में बच्चे पूरे वर्ष खुले में पढ़ते हैं। निम्न आय वर्ग के माता-पिता से पैदा हुए छह मिलियन से अधिक बच्चे अशिक्षित रहते हैं। 63,000 प्राथमिक विद्यालयों में से एक प्रतिशत में भी फर्नीचर, शौचालय, पीने के पानी और खेलों की सुविधा नहीं है। चालू वित्तीय वर्ष में 3113 नए शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिनमें से 2747 महिलाएँ हैं। अब 13,270 प्राथमिक विद्यालयों में से प्रत्येक में कम से कम दो शिक्षक हैं।
बिहार के अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों की कक्षाएँ अपर्याप्त हैं।
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