निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर दीजिए। इन मदों के लिए आपके उत्तर केवल परिच्छेद पर आधारित होने चाहिए।

ऊर्जा और जलवायु संबंधी नीति-निर्माण के क्षेत्र में भारत चुनौतीपूर्ण आसन्न भविष्य का सामना कर रहा है। समस्याएँ कई हैं : जीवाश्मी ईंधन की उत्पादन क्षमताओं में अस्थिरता; सबसे ग़रीब लोगों के लिए बिजली और खाना पकाने के आधुनिक ईंधन की सीमित पहुँच; अस्थिर वैश्विक ऊर्जा के संदर्भ में ईंधन के आयात में वृद्धि; बिजली के निरंतर मूल्य निर्धारण और शासन की चुनौतियों के फलस्वरूप बिजली की अत्यधिक कमी अथवा अतिरिक्त आपूर्ति; केवल यही नहीं, भूमि, जल तथा वायु पर बढ़ता हुआ पर्यावरणीय विवाद। किंतु यह सब इतना निराशाजनक भी नहीं है बढ़ते हुए ऊर्जा दक्षता कार्यक्रम; एकीकृत शहरीकरण और परिवहन नीति पर चर्चा; ऊर्जा तक पहुँच और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास; और नवीकरणीय ऊर्जा हेतु साहसिक पहल, भले ही इनकी पूरी संकल्पना तैयार नहीं है, तथापि ये परिवर्तन की आशा की ओर संकेत करते हैं।

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उपर्युक्त परिच्छेद का सर्वाधिक निर्णायक संदेश प्रस्तुत करता है?

1
भारत के ऊर्जा निर्णयन की प्रक्रिया सदैव जटिल और अंतः संबंधित है।
2
भारत की ऊर्जा और जलवायु नीति संधारणीय विकास के लक्ष्यों के लिए अत्यधिक सुसंगत है।
3
भारत की ऊर्जा और जलवायु संबंधी कार्रवाई, इसके व्यापक सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लक्ष्यों के लिए अनुकूल नहीं हैं।
4
भारत के ऊर्जा निर्णयन की प्रक्रिया सीधे तौर पर आपूर्ति-उन्मुख है और माँग पक्ष की उपेक्षा करती है।

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