मध्य प्रदेश में गुर्जर-प्रतिहार कालीन मूर्तियों में कौन-सी विशेषता शामिल नहीं है?
1
मूर्तियों के शरीर एकल और प्रवाहमय रेखाओं के संयोजन के कारण गतिमान प्रतीत होते हैं।
2
चेहरा थोड़ा दीर्घवृत्ताकार है। अधर (होठ) चौड़ा परन्तु स्पष्ट है, जिसमें ऊपरी होंठ ठुड्डी से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है।
3
मूर्तियों की बाह्याकृति बहुत कम है। इनमें गुप्तकालीन मूर्तियों जैसी सादगी शामिल है।
4
पौराणिक दृश्यों के अंकन में त्रि-आयामी प्रभाव लागू किया गया है ताकि मूर्तियाँ बोझिल न हों।