काँच की एक प्लेट पर जल की बूँद फैल कर एक पतली परत बन जाती है जबकि पारे की बूँद गोलाकार बनी रहती है क्योंकि -
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काँच के साथ जल की संसंजन क्षमता, इसकी आसंजन क्षमता से अधिक होती है।
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पारा एक धातु है।
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पारे का धनत्व, जल के घनत्व से अधिक होता है।
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काँच के साथ पारे की संसंजन क्षमता, इसकी आसंजन क्षमता से अधिक होती है।