एक आदर्श गैस के n अणु कोई चक्रीय प्रक्रम ABCA (आरेख देखिए) करते है जिसमें नीचे दिए गए प्रक्रम होते हैं।

A → B : ताप T पर समतापीय प्रसार जिससे आयतन दो गुना, V1 से V2 = 2V1 और दाब P1 से P2 हो जाता है।

B → C : समदाबी संपीड़न-दाब P2  पर आरंभिक आयतन V1 तक होता है।

C → A : समआयतनिक परिवर्तन जिसमें दाब में परिवर्तन P1 से P2 होता है।

इस सम्पूर्ण चक्रीय प्रक्रम ABCA में किया गया कुल कार्य होगा :

1
शून्‍य
2
nRTln 2
3
nRT\(\left( {\ln 2 + \frac{1}{2}} \right)\)
4
nRT\(\left( {\ln 2 - \frac{1}{2}} \right)\)

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