मुगलकाल में ‘पाहि-काश्त’ से तात्पर्य था-
1
वह कृषक, जो स्वयं भूमि का स्वामी होता था और उसका खेत और घर उसी गाँव में होता था।
2
एक किसान जिसका खेत और घर अलग-अलग गाँवों में था।
3
वे कृषक, जिनके पास सामर्थ्य से अधिक भूमि होती थी और भूमि जोतने के लिए दूसरों को भूमि दे देते थे।
4
वे कृषक जो भूमिहीन होते थे।