कार्ल मार्क्स के अनुसार, पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली के तहत पूंजी का संचय निम्नलिखित की ओर ले जाता है:
1
सर्वहारा वर्ग और पूंजीपति वर्ग दोनों के लिए धन में स्थायी वृद्धि, क्योंकि बाजार तंत्र निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करता है।
2
श्रम का शोषण, जहां श्रमिकों द्वारा निर्मित अधिशेष मूल्य पूंजीपतियों द्वारा हड़प लिया जाता है, जिससे वर्ग विभाजन बढ़ता है और अंततः व्यवस्थागत पतन होता है।
3
पूंजीपतियों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण समान धन वितरण की ओर क्रमिक परिवर्तन से नवाचार बढ़ता है और असमानता घटती है।
4
श्रम के युक्तिकरण और धन के न्यायपूर्ण वितरण पर ध्यान केन्द्रित करना, जिससे पूंजीवादी व्यवस्था में वर्ग सामंजस्य स्थापित हो सके।
5
अनुत्तरित प्रश्न