‛‛पुस्तकें अपने आप में कुछ भी नहीं हैं । उनके पास श्‍वेत पत्र से अधिक कोई अर्थ नहीं है, जब तक कि उन्‍हें माँग से सेवा योग्‍य नहीं बनाया जाता’’, यह किसके द्वारा कहा गया ?

1
एल. आर. मैक्कोल्विन
2
मेलविल ड्यूवी
3
फ्रां‍सिस ड्रूरी
4
एच. ई. हेन्‍स

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