राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा, 2005 के अनुसार, स्कूली गणित उन परिस्थितियों में होना चाहिए जहाँ बच्चे 'गणित में आनंद' लेना सीखें। यह सिद्धांत इस आधार-वाक्य पर आधारित है कि
1
बच्चे को पाठ्यपुस्तक की समस्याओं को हल करने में आनंद आना चाहिए।
2
बच्चों को गणितीय पहलियों को हल करने में आनंद आना चाहिए।
3
गणित का जीवन भर उपयोग और आनंद दोनों लिया जा सकता है।
4
गणित में आकलन आनंददायक हो सकता है।
5
अनुत्तरित प्रश्न