वन्य प्रकार और rll उत्परिवर्ती T4 जीवाणुभोजी के संक्रमण के कारण उत्पन्न विभिन्न प्रकार के ई. कोलाई (E. coli) प्रभेदों के प्लाक आकारकी नीचे सारांशित है।
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ई. कोलाई प्रभेद |
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T4 जीवाणुभोजी प्रभेद |
B |
K |
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वन्य प्रकार |
छोटा और चिथड़ेदार |
छोटा और चिथड़ेदार |
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rll उत्परिवर्ती |
बड़ा और गोल |
कोइ प्लाक नहीं |
निम्नलिखित दो प्रयोग किए गऐ:
प्रयोग I: ई. कोलाई के K प्रभेद पर दो स्वतंत्र rll उत्परिवर्ती का सह-संक्रमण अनेकों प्लाक देता है, जो छोटी और चिथड़ेदार होते हैं।
प्रयोग II: उपरोक्त rll उत्परिवर्ती के साथ ई. कोलाई के B प्रभेद को सह-संक्रमित किया गया। इस प्लाक से प्राप्त T4 जीवाणुभोजी को ई. कोलाई के K प्रभेद को संक्रमित करने के लिए उपयोग किया गया। कुछ प्लाक प्राप्त हुए जो कि छोटे और चिथड़ेदार थे।
उपरोक्त अवलोकनों के आधार पर कुछ कथन दिए गए हैं:
A. प्रयोग। दर्शाता है कि दो उत्परिवर्ती एलीलिक हैं।
B. प्रयोग II दर्शाता है कि ई. कोलाई के K प्रभेद को संक्रमित करने वाला वन्य प्रकार T4 जीवाणुभोजी पुनःसंयोजन घटनाओं के फलस्वरूप बनता है।
C. प्रयोग II में, अगर ई. कोलाई के B प्रभेद से पृथक किए T4 जीवाणुभोजी का उपयोग ई. कोलाई की B प्रभेद को संक्रमित करने के लिए किया जाए तो सारे प्लाक बड़े और गोल होंगें।
निम्न विकल्पो में कौन सा एक कथनों के सभी सही संयोजन को दर्शाता है?