यदि स्कूल में पेशेवर परामर्शदाताओं की उपलब्धता नहीं हो तो इसके परिणामस्वरूप:

1
सह-पाठ्यचर्या कार्यकलाप में सहभागिता कम होगी।
2
बालकों में मानसिक रुग्णता (विकार) बढ़ेगा।
3
विद्यार्थियों की पढ़ाई में कम रुचि होगी।
4
अभिप्रेरणा के स्तर में ह्रास होगा।

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