योगात्मक आकलन है-
1
विद्यार्थियों की प्रगति का निरंतर अनुवीक्षण है।
2
शिक्षण-अधिगम में परिवर्तन करने हेतु प्रतिपुष्टि मुहैया करने के लिए होता है।
3
विद्यार्थियों को पास अथवा फेल करने के लिए मार्गदर्शक माना जाता है।
4
विद्यार्थियों के अधिगम में कमी की पहचान करने में तथा उन्हें ठीक करने के लिए होता है।