'असंतुलित' संवृद्धि तब प्राक्कल्पित होती है, जब
1
प्रसार, विविध संवृद्धि मार्गों पर साथ-साथ हो सकता हो
2
श्रम की पूर्ति नियत हो
3
पूँजी की पूर्ति असीमित हो
4
सक्रिय क्षेत्रकों के लिए आवश्यक होता है कि वे मंद पड़े क्षेत्रकों को क्रियाशील बनाएँ और वे उन्हें क्रियाशील बनाते हैं।