निम्नलिखित में से कौन सा कथन चोल समाज में मंदिरों की भूमिका को सटीक रूप से दर्शाता है?
A) चोल समाज में मंदिर केवल पूजा के स्थान थे, आर्थिक या सामाजिक जीवन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
B) तंजावुर और गंगईकोंडचोलपुरम जैसे बड़े मंदिर राजराजा और राजेंद्र द्वारा बनाए गए थे और वे वास्तुकला और मूर्तिकला की दृष्टि से एक चमत्कार थे।
C) चोल मंदिर प्रायः बस्तियों के केन्द्र बन गए तथा आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन के केन्द्र बन गए।
D) मंदिरों को दी गई भूमि का उपयोग पुजारियों, संगीतकारों, नर्तकों जैसे सेवा प्रदाताओं के भरण-पोषण के लिए किया जाता था, परंतु रसोइयों और सफाई कर्मचारियों के लिए नहीं।
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A,B,C
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A,B
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B, C
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A,B,C,D