निम्नलिखित कथन पर विचार करें:
अभिकथन (A): 'विश' शब्द ऋग्वैदिक समाज में पुरोहितों को संदर्भित करता था।
कारण (R): पुजारियों को भजनों का प्राथमिक वाचक माना जाता था।
1
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, और कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।
2
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, लेकिन कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
3
अभिकथन (A) सत्य है, लेकिन कारण (R) असत्य है।
4
अभिकथन (A) असत्य है, लेकिन कारण (R) सत्य है।