शरीर की निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार हमलावर की स्वेच्छया मृत्यु कारित करने अथवा कोई अन्य अपहानि करने की सीमा तक नहीं होता है, यदि वह अपराध, जिसके कारण उस अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, एतस्मिन् पश्चात प्रगणित प्रकारों में से किसी भी प्रकार का है;
1
बलात्संग करने के आशय से किया गया हमला।
2
व्यपहरण या अपहरण करने के आशय से किया गया हमला।
3
इस आशय से किया गया हमला कि किसी व्यक्ति का ऐसी परिस्थितियों में सदोष परिरोध किया जाये, जिससे उसे युक्तियुक्त रूप से आशंका हो कि वह अपने को छुड़वाने के लिए लोक प्राधिकारियों की सहायता प्राप्त कर सकेगा।
4
प्रकोपन पर गंभीर उपहति कारित करने हेतु हमला।