Comprehension Passage

20वीं शताब्दी के मध्य में भूगोल में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया - मात्रात्मक क्रांति। इस बौद्धिक आंदोलन ने भौगोलिक घटनाओं के अध्ययन के लिए गणित, सांख्यिकी और स्थानिक मॉडलिंग के व्यवस्थित अनुप्रयोग की विशेषता वाले एक नए युग का प्रारंभ किया। इससे पहले, भूगोल वर्णनात्मक और गुणात्मक दृष्टिकोण पर बहुत अधिक निर्भर था, जो क्षेत्रीय विविधताओं और स्थानों की अनूठी विशेषताओं पर केंद्रित था। मात्रात्मक क्रांति ने इस पर ज़ोर देकर चुनौती दी: वस्तुनिष्ठता: सांख्यिकीय विश्लेषण का उद्देश्य वास्तविक साक्ष्य और व्यक्तिपरक व्याख्याओं से आगे बढ़ना है। सामान्यीकरण: स्थानिक पैटर्न और संबंधों की पहचान करके, भूगोलवेत्ताओं ने सार्वभौमिक मॉडल विकसित करने का प्रयास किया जो विभिन्न स्थानों पर आवर्ती घटनाओं की व्याख्या कर सके। सिद्धांत निर्माण: स्थानिक वितरण और प्रक्रियाओं को समझाने के लिए स्थापित सिद्धांतों का परीक्षण करने और नए निर्माण करने के लिए मात्रात्मक तरीकों की अनुमति दी गई है। इस क्रांति ने भूगोल के विभिन्न उपक्षेत्रों को प्रभावित किया। 

मात्रात्मक क्रांति की एक आलोचना यह है कि:

1
अधिक वस्तुनिष्ठ भौगोलिक विश्लेषण के लिए एक रूपरेखा प्रदान की गई।
2
स्थानों के जटिल सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को अनदेखा किया गया।
3
इससे आवश्यक रूप से अत्यधिक जटिल गणितीय मॉडल का विकास हुआ।
4
भौगोलिक अनुसंधान के सभी क्षेत्रों पर लागू नहीं किया गया।

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