रूसो ने 'सामान्य इच्छा' और 'सभी की इच्छा' के बीच कैसे अंतर किया है?
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'सामान्य इच्छा' व्यक्ति की इच्छाओं के बारे में है, जबकि 'सभी की इच्छा' सामूहिक हित का प्रतिनिधित्व करती है।
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'सामान्य इच्छा' सामान्य भलाई या सार्वजनिक हित को दर्शाती है, जबकि 'सभी की इच्छा' केवल व्यक्तिगत हितों का योग है।
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रूसो के दर्शन में 'सामान्य इच्छा' और 'सभी की इच्छा' विनिमेय शब्द हैं।
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रूसो का मानना था कि 'सभी की इच्छा' को हमेशा 'सामान्य इच्छा' पर हावी होना चाहिए।