भारतीय राजनीतिक चिंतन में, विभिन्न विद्वान 'धर्म' और 'दंड' की अवधारणाओं की व्याख्या कैसे करते हैं?

1
जवाहरलाल नेहरू के अनुसार, 'धर्म' और 'दंड' शासन के रूप हैं, 'धर्म' नैतिक शासन पर केंद्रित है और 'दंड' सजा पर जोर देता है।
2
भीखू पारेख का तर्क है कि 'धर्म' नैतिक कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का सिद्धांत है, जबकि 'दंड' कानून और व्यवस्था का प्रवर्तन है।
3
अमर्त्य सेन 'धर्म' की व्याख्या आर्थिक समानता की अवधारणा के रूप में करते हैं, जबकि 'दंड' का तात्पर्य मुक्त बाजार प्रणाली से है।
4
गांधीजी का मानना था कि 'धर्म' और 'दंड' विरोधी ताकतें हैं, 'धर्म' शांतिपूर्ण प्रतिरोध का प्रतीक है और 'दंड' हिंसक शासन का प्रतीक है।

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