निम्नांकित गद्यांश को ध्यान पूर्वक पढ़िए और प्रश्न के उत्तर दीजिए :
व्यावसायिक परिदृश्य में जहाँ प्रचालन (संक्रिया) और प्रकार्य में सदृश ब्लूप्रिंट का अनुसरण किया जाता है, वस्तुतः विभेदक जिसके फलस्वरूप व्यवसाय सफल हो पाता है, यह इसकी विशिष्ट कार्य संस्कृति है। किसी संगठन की संस्कृति विविध कारकों यथा नेतृत्व, कर्मकारों की संख्या, और बाह्य प्रभावों से निर्मित होती है। इन कारकों से कंपनी की सफलता और इसका समग्र कार्यनिष्पादन बहुत अधिक प्रभावित होता है। कार्य असुरक्षा और अनिश्चितताएँ बढ़ने के कारण कार्यस्थलों में संगठनात्मक संस्कृतियों के आकार को नया स्वरूप देने पर विचार किया जा रहा है।
डेलोलाइट द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार 94% अधिशासी और 88% कर्मचारी इस बात को स्वीकार करते हैं कि कंपनी का सफलता अवधारित करने में संगठन की संस्कृति की अहम् भूमिका होती है। सर्वेक्षण में सम्मिलित 76% कर्मचारियों ने एक सकारात्मक संस्कृति विकसित करने में सु-परिभाषित व्यावसायिक कार्यनीति के प्रत्यक्ष प्रभाव को उजागर (रेखांकित) किया। वैश्विक परिघटना से भी भारत की तेजी से आगे बढ़नेवाला स्टार्ट अप पारितंत्र बहुत अधिक प्रभावित होता है जहाँ सीमित समय और संसाधनों से बहुत से कार्य को अनिवार्यतः पूरा किया जाना होता है। इन संगठनों के लिए अनिवार्य हो जाता है कि वे सक्रियता नवोन्मेष केन्द्रित मानसिकता और अपने कर्मचारियों में पुनरोत्थान जैसे गुणों को रोपित कर कार्य संस्कृति की संरचना नए सिरे से तैयार करें।
इसके अलावा भारत की कार्य संस्कृति में कर्मचारी की मानसिक आरोग्यता पर बहुत अधिक बल दिया गया है। महामारी काल के बाद बहुत से संगठन, जिनमें भारत के संगठन भी शामिल हैं, कर्मचारी की प्रसन्नता और समग्र कुशलता को प्राथमिकता देने की दिशा में प्रवृत हो रहे है। नेतृत्व परिप्रेक्ष्य में इस परिवर्तन से कारपोरेट वातावरण (परिवेश) भी अपनी कार्य संस्कृति पर बल देने के लिए प्रेरित हुआ है क्योंकि अब कर्मचारी गण कार्य और जीवन के संतुलित समीकरण को प्राथमिकता देते हैं। आज नौकरी की तलाश करने वाले बहुत से लोग संभाव्य अवसरों का मूल्यांकन करने के क्रम में सुरक्षित, समावेशी और लचीले कार्य परिवेश को चुनते हैं।