नीचे दिए गद्यांश को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

कोविड संकट के प्रति भारत सरकार की मौद्रिक नीति प्रतिक्रिया में एक ओर खाद्य एवं ऊर्वरकों पर बढ़ती सब्सिडी और दूसरी ओर ईंधन एवं कुछ आयातित उत्पादों पर करों में कटोती का न्यायसंगत मिश्रण शामिल है। इन अतिरिक्त मौद्रिक दबावों के बावजूद, संघ सरकार पटरी पर लोट आयी है। गतिविधि में प्रतिप्राप्ति, प्रत्यक्ष करों, सामान और सेवा कर (जी एस टी) से राजस्व में प्रफुल्लता और बजट में यथार्थवादी पूर्वानुमानों की वजह से संघ सरकार के मौद्रिक कार्य निष्पादन में नव शक्ति का संचार हुआ है। प्रत्यक्ष करों और जी एस टी में जबरदस्त वृद्धि के चलते अप्रैल से नवम्बर 2022 से सकल कर राजस्व में वर्ष दर वर्ष 15.5% की वृद्धि दर्ज हुई। इसी अवधि के दौरान सकल जी एस टी समाहरण में वर्ष- दर वर्ष 24.8% की वृद्धि हुई है। उच्च राजस्व व्यय के बावजूद पूंजीगत व्यय पर वर्ष के दौरान संघ सरकार का बल जारी रहा है। केंद्र के पूंजीगत व्यय में सकल घरेलू उत्पाद में 1.7 प्रतिशत के दीर्घावधिक औसत (वित्तीय वर्ष 2009 से वित्तीय वर्ष 2020) से वित्तीय वर्ष 2022 में सकल घरेलू उत्पाद में 2.5% तक सतत रूप से बढ़ोत्तरी है। केंद्र ने ब्याज मुक्त ऋण प्रदान करके और उधार लेने की अधिक सीमा तय कर के राज्य सरकारों को प्रोत्साहित किया ताकि वे पूंजीगत व्यय पर व्यय की प्राथमिकताएं तय कर सकें। सरकार ने पूंजीगत व्यय को प्रभावित करने वाले बुनियादी सुविधाओं की बहुलता वाले क्षेत्रों जैसे सड़क और राजमार्ग, आवासन एवं शहरी कार्यों पर नियतनों को भी प्रोत्साहन दिया है। पूंजीगत व्यय में इस वृद्धि के मध्यावधि वृद्धि जीडीपी अनुपात में सतत सरक ऋण के प्रति निहितार्थ होंगे।

संघ सरकार के मौद्रिक कार्य निष्पादन में नवशक्ति के संचार को लेकर निम्नलिखित में से कौन-सा सही नहीं है:

1
आर्थिक गतिविधियों में प्रतिप्राप्ति।
2
उत्साहवर्धक GST राजस्व।
3
खाद्य एवं उर्बरक सब्सिडी से संबंधित व्यय मित्तव्ययता उपाय।
4
बजट में यथार्थवादी पूर्वानुमान।

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