निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और प्रश्न के उत्तर दीजिए।
वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के चरण का सामना कर रही है, विभिन्न क्षेत्रों में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि या तो घट रही है या थोड़े संकुचन का अनुभव कर रही है। व्यापारिक गतिविधियों में कुछ सुधार के बावजूद, अनेक देशों के भीतर संपत्ति क्षेत्र और बढ़ते सार्वजनिक ऋण के मुद्दों सहित बाह्य माँग की विशिष्ट चुनौतियाँ बनी हुई हैं। यद्यपि श्रम बाजार लचीलापन प्रदर्शित करते हैं, विशेषकर दिहाड़ी वृद्धि में कुछ राहत के चिह्न दिखाई देते हैं और साथ ही कुछ उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में बेरोजगारी की दर बढ़ रही है। फिर भी, श्रम उत्पादकता और कारोबार निर्माण में धनात्मक समछेदी है, जो श्रम गतिशीलता में संवृद्धि कृत्रिम बौद्धिकता एवं मशीन लर्निंग में प्रगति को विशिष्टता प्रदान करती है।
केंद्रीय बैंकों द्वारा प्रत्याशित दरों में कटौती को स्थगित करने के बावजूद सरकारी बांड में पूर्व के निम्न स्तर में बढ़ोत्तरी हुई है। तथापि निरंतर बढ़ते हुए सरकारी ऋण स्तरों के फलस्वरूप बांड बाजारों में संभाव्य परिवर्त्यता के बारे में चिंताओं के मध्य केन्द्रीय बैंक के मूल्यांकन की तुलना में बाँड की कीमतें अभी भी सतर्क निर्णय को परिलक्षित करती हैं।
इसके विलोमतः भारत के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद के विस्तार में सतत छः तिमाही में वृद्धि से सकारात्मक आर्थिक वृद्धि के प्रमाण देकने को मिला है। इस वृद्धि को भारी माँग की स्थितियों और निवेश में वृद्धि से गति प्राप्त होती है। यद्यपि निजी उपभोग व्यय में सापेक्षतः मंदी रही है। विनिर्माण क्षेत्र में दो अंकों में भारी वृद्धि देखने को मिली है जबकि निर्माण गतिविधियाँ प्रबलतम स्थिति में बनी हुई हैं। यद्यपि प्रतिकूल मौसम के कारण कृषि पूँजी संकुचन हुआ है, फिर भी भारत के वित्तीय बाजार बढ़ते स्टॉक बाजार और मुद्रा के मजबूतीकरण के साथ प्रगति कर रहे हैं। इसके अलावा, देश में गरीबी को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।