निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
"मानिटरी पालिसी ट्रांसपेरेंसी एंड एंकरिंग ऑफ इनफ्लेशन एक्सपेक्टेशंस इन इंडिया" शीर्षक के अध्ययन में भारत के लिए मौद्रिक नीति पारदर्शिता का एक सूचकांक बनाया गया है और मुद्रास्फीति प्रत्याशाओं के स्थिरीकरण में पारदर्शिता की भूमिका की जांच की गई है। आनुभविक परिणाम दर्शाते हैं कि 2016 में नम्य मुद्रास्फीति लक्ष्य (FIT) को स्वीकार किए जाने के बाद से नीति पारदर्शिता के अंश में वास्तव में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। आगे, आनुभविक साक्ष्य इंगित करता है कि पूर्वानुमान लगानेवाले पेशेवरों और परिवारों की मुद्रास्फीति प्रत्याशाएं FIT के बाद की अवधि में कमजोर रूप में स्थिर थी, यद्यपि परिवारों की प्रत्याशाएं अनिवार्य रूप में मुद्रास्फीति सह्य सीमा के भीतर नहीं थी। संक्रमण काल [2014 में स्वारोपित अवस्फीतिकारी बहाव (ग्लाइड) मार्ग और FIT को स्वीकार किए जाने के बाद] के दौरान वास्तविक मुद्रास्फीति व प्रत्याशाएं दोनों अवरोही मार्ग पर चली, जिसकी परिणति इनके बीच एक सकारात्मक संबंध में हुई। संक्रमण पूर्व की अवधि के दौरान, जब सुस्पष्ट मुद्रास्फीति लक्ष्य अनुपस्थित था, प्रत्याशाएं भी, बेशक उच्चतर स्तर पर ही सही, समुचित रुप से स्थिर थी।