Comprehension Passage

निम्नांकित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और प्रश्न के उत्तर दीजिए:

अन्तरराष्ट्रीय विधि का आसंजक तत्व सर्वोच्च मूलभूत प्रतिमान या सिद्धांत पर आधारित है जिसे पैक्टा संट सर्वेडा कहा जाता है। इसका तात्पर्य यह है कि राज्यों द्वारा किए गए करारों की पुनरावृत्ति उनके सद्भाव के आधार पर की जाती है। यह अन्तरराष्ट्रीय विधि की सुस्थापित और मान्य प्रथा है। अन्तरराष्ट्रीय विधि के प्रथागत सिद्धांत को अब कूटबद्ध (संहिताबद्ध) किया गया है और इसका उल्लेख  वियना अभिसमय संधि विधि 1969 के अनुच्छेद 26 में है।

पैक्टा संट सर्वंदा का सिद्धांत भी राज्यों के वास्तविक अभ्यास पर आधारित है। यह राज्यों द्वारा किए गए करारों के महत्व पर जोर देता है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून का आधार मानता है।

एक मत है कि अन्तरराष्ट्रीय विधि की बंध्यकारी प्रबलता को केवल पैक्टा संट सर्वेडा के सिद्धांत पर ही आधारित होने की बात सत्य से परे है। इसमें अन्तरराष्ट्रीय विधि के उन प्रथागत नियमों के बंध्यकारी प्रबलता की व्याख्या नहीं होती है जो राज्यों के मध्य किए गए करार पर आधारित नहीं हैं। इस बात की अनुमति कि अन्तरराष्ट्रीय प्रथागत विधि करारों पर निर्भर नहीं करती है और यह कि पैक्टा सेट सर्वेडा सिद्धांत अपने आप में प्रथागत विधि का नियम है, के फलस्वरूप मूलभूत प्रतिमान के नए आधार प्रोद्भूत हुए।

केल्सन ने एक सूत्र अभिनिश्चित किया है जिसमें प्रयोग को तथ्य माना गया है जो अन्तरराष्ट्रीय विधि के शासन का उद्गम है- "राज्यों को अपने प्रथागत व्यवहार के अनुरूप ही व्यवहार करना चाहिए।"

केल्सन ने निम्नांकित में से किस पर बल दिया है? 

1
पैक्ट संट सर्वेडा
2
राज्य का व्यवहार प्रथागत अंतरराष्ट्रीय विधि के अनुरूप होना
3
प्रथागत अन्तरराष्ट्रीय विधि के विकास के लिए पैक्टा संट सर्वेडा का उत्तरदायी होना
4
पैक्टा संट सर्वेडा का प्रथागत अन्तरराष्ट्रीय विधि से स्वतंत्र होने पर

Sponsored

hivanix.in

Visit

This quiz is brought to you by hivanix.in

🌐 Web App Development

Quick Navigation