निम्नलिखित गद्यांश को सावधानीपूर्वक पढ़े और प्रश्न के उत्तर दीजिए :
एक यह है कि, शक्ति का मनमाने ढंग से प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए । इसका अर्थ यह है कि उसका उस प्रयोजन के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए, जिसके लिए यह प्रदत्त किया गया है। इसका यह भी अर्थ है कि शक्ति का क़ानूनी क्षेत्र भीरत प्रयोग किया जाना चाहिए ; और उसका तात्पार्यत प्रयोग सिर्फ अधिकारातीत होगा, बल्कि ‘मनमाने' शब्द के अर्थ में भी सही होगा। लेकिन, माध्यस्थन की साधारण रूप से अस्वीकृति विधि के शासन के मूल्यों के संरक्षण के लिए पर्याप्त नहीं है। भारतीय न्यायालयों ने इससे आगे बढ़ कर विधि के शासन की विशिष्ट सकारात्मक विषयवस्तु पर बल दिया है। इसमें नैसर्गिक न्याय के नियम शामिल हैं, जिनका न सिर्फ न्यायिककल्प कार्यवाई, बल्कि विशुद्ध रुप से प्रशासनिक कार्यवाई मे भी पालन किया जाना चाहिए । न्यायिक व्याख्या के अनुसार नैसर्गिक न्याय की आवश्यकताओं का कार्य-क्षेत्र और विषयवस्तु समय-समय पर भिन्न-भिन्न रही हैं, लेकिन इन पर व्यापक रुप से बल बना रहता हैं। इसके अतिरिक्त, निर्णय के आधार के रुप में सूचना तक पहूँच भारतीय न्यायपालिका की पहले से ही एक महत्त्वपूर्ण व्यस्तता रही है क्योंकि इसमें किसी भी विध की प्रशासनिक कार्यवाई की न्यायिक समीक्षा में बाधा डालने की प्रवृत्ति होती है।
इसका अर्थ है कि न्यायालयों ने समय-समय पर बल दिया है कि प्रशासनिक शक्ति का प्रयोग कारण के साथ देना चाहिए, यद्यपि इस दायित्व की ठीक-ठीक स्थिति का कारण देना अभी भी अनवधार्य है। साथ ही राज्य ने अपने आर्थिक क्रियाकलायों की प्राप्ति लिए विधि के शासन की धारणा का निरंतर विस्तार किया है।