SDG वैश्विक लक्ष्य हैं, जो पूर्ववर्ती सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों पर निर्मित हैं। वे संपूर्ण, सार्वभौमिक और एकीकृत हैं तथा योजनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला को लागू करके गरीबी और असमानता, आर्थिक विकास, नवाचार, टिकाऊ खपत और उत्पादन, जलवायु परिवर्तन, शांति और न्याय और साझेदारी के मुख्य क्षेत्रों पर जोर देते हैं। भारत सरकार की वर्तमान प्रमुख नीतियां और कार्यक्रम जैसे स्वच्छ भारत मिशन (SEM), बेटी बचाओ बेटी पढाओ (PMUY), प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY), दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY) और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) ने इस संबंध में भारत की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भारत के संघीय संदर्भ में, कार्यक्रम और योजनाएं मूल रूप से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्तर पर लागू की जाती हैं। इसलिए, विभिन्न SDGs पर प्रगति की निगरानी उचित नीतिगत कार्रवाइयों और राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना का निर्माण करने के लिए महत्वपूर्ण है। नीति आयोग 17 SDGs में से 13 में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की प्रगति को ट्रैक करने के लिए एक एकल मापन योग्य सूचकांक के साथ आया है (राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों में तुलनीय डेटा की अनुपलब्धता के कारण लक्ष्य 12, 13, 14 और 17 को छोड़कर)। यह SDG सूचकांक भारत की प्रगति का एक समग्र मूल्यांकन प्रदान करता है। यह सूचकांक सूचित नीति निर्माण में सहायता करता है क्योंकि यह 62 चयनित संकेतकों के एक सेट में राष्ट्रीय और राज्य स्तर दोनों के सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक मापदंडों की स्थिति को दर्शाता है। स्कोर 0 से 100 के बीच भिन्न होता है। 65 के बराबर या उससे अधिक स्कोर वाले राज्यों को फ्रंट रनर्स के रूप में माना जाता है, 50-64 की रेंज में स्कोर वाले राज्यों को परफॉर्मर्स रूप में माना जाता है और यदि राज्यों का स्कोर 50 से कम है तो उन्हें एस्पिरेंट्स के रूप में माना जाता है। 100 के सूचकांक स्कोर वाले राज्यों को अचीवर्स के रूप में वर्गीकृत किया जाता है अर्थात् राज्यों ने 2030 के लिए निर्धारित राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त कर लिया है। 0 का स्कोर सबसे खराब प्रदर्शन दर्शाता है। SDG सूचकांक स्कोर राज्यों के लिए 42 और 69 के बीच तथा केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 57 और 68 के बीच होता है।
अनुमान बताते हैं कि विश्व भर में इन लक्ष्यों के वित्तपोषण के लिए US$5 से US$7 ट्रिलियन प्रति वर्ष और विकासशील देशों में US$3.9 ट्रिलियन प्रति वर्ष की आवश्यकता है। हालांकि, विकासशील देशों में मौजूदा निवेश करीब 1.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है, जिससे प्रति वर्ष 2.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की कमी हो रही है (UNCTAD, 2014)। इस पैमाने की वैश्विक कार्रवाई के लिए विश्व भर में प्रभावी वित्तपोषण और कार्यान्वयन के लिए विभिन्न सरकारों, विकास संस्थानों, निजी क्षेत्र और वित्तीय संस्थानों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता है। सतत विकास के लिए प्रत्येक राष्ट्र को अपने लक्ष्यों को प्राथमिकता देने और स्थानीय चुनौतियों, क्षमताओं और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार विभिन्न योजनाओं/कार्यक्रमों को सावधानीपूर्वक लागू करने की आवश्यकता है। भारत SDGs प्राप्त करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को अपनाता है।