दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और तत्पश्चात् इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
किसी व्यक्ति की निजता उसकी प्रतिष्ठा का आवश्यक पक्ष है। गरिमा में तात्विक और सहायक दोनों प्रकार के पहलू होते हैं। तात्विक पहलू के रूप में मानव की गरिमा एक हकदारी या अपने आप में संवैधानिक रूप से संरक्षित हित है। अपने सहायक पक्ष के रूप में गरिमा और स्वतंत्रता परस्पर अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं, और दोनों एक दूसरे को प्राप्त करने के लिए सुविधाजनक साधन है। व्यक्ति की उसके निजता क्षेत्र को संरक्षित करने की योग्यता उसे जीवन और स्वतंत्रता के सभी पहलुओं को मूर्त रूप देने के योग्य बनाती है। स्वतंत्रता का अर्थ व्यापक होता है जिसमें निजता गौण समूह है। सभी स्वतंत्रताओं का प्रयोग निजता में नहीं किया जा सकता है। तथापि निजता की गुंजाइश होने पर ही दूसरी स्वतंत्रताओं को पूरा किया जा सकता हैं। निजता, व्यक्ति को शरीर और मस्तिष्क की स्वयत्तता बनाए रखने के योग्य बनाती है। जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय लेने की योग्यता व्यक्ति की स्वायत्तता होती है। निजता को स्वतंत्र मौलिक अधिकार के रूप में व्यक्त नहीं किया गया परंतु इससे इसे प्राप्त संवैधानिक संरक्षण में कमी नहीं आती है, जब निजता की वास्तविक प्रकृति और स्पष्ट रूप से संरक्षित मौलिक अधिकारों के साथ इसके संबंध को समझ लिया जाता है। निजता संरक्षित स्वतंत्रताओं के पहुँच में निहित होती है।