निम्नलिखित गद्यांश को सावधानीपूर्वक पढ़े और नीचे दिये गये प्रश्नो के उत्तर दें:
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर और इस न्यायालय के अनेक पुर्वोदाहरणों के द्वारा गरिमा पूर्ण जीवन के अधिकार को एक मानवाधिकार के रूप में मान्यता दी गई है और इसलिए संवैधानिक न्यायालयों को प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करने का प्रयत्न करना चाहिए क्योंकि गरिमा पूर्ण जीवन के अधिकार के बगैर प्रत्येक अन्य अधिकार निरर्थक हो जाएगा। गरिमा प्रत्येक व्यक्ति का एक अविभाज्य पक्ष है जो उस व्यक्ति के प्रत्येक पहलू के प्रति दूसरों से पारस्परिक आदर की अपेक्षा करता है जिसे वह व्यक्ति अपने व्यक्तित्व, चाहे वह कोई अभिविन्यास हो अथवा चयन की वैकल्पिक अभिव्यक्ति, का एक मौलिक गुण मानता है। संविधान ने अभिव्यक्ति और निर्बाध चुनाव के अधिकार सहित प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार सुनिश्चित करने और उसकी रक्षा करने का कर्त्तव्य न्यायपालिका को सौपा है। ताकि वह व्यक्ति गरिमापूर्ण जीवन का अपना मौलिक अधिकार प्राप्त कर सके।
लैंगिक अभिविन्यास उन जैविक संवृत्तियों में से एक है जो किसी व्यक्ति का स्वाभाविक और प्राकृतिक गुण होता है और जिसे स्नायविक और जैविक कारक नियोजित करते हैं। लैंगिक विज्ञान के अनुसार कोई व्यक्ति किसके प्रति आकर्षित होगा इस पर अत्यल्प अथवा शुन्य नियंत्रण होता है। किसी व्यक्ति के लैंगिक अभिविन्यास के आधार पर किया गया कोई भी भेदभाव अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन होगा।