शिवगौड़ा बनाम चंद्रकांत AIR 1965 SC 212 एक युगांतकारी वाद है, जो इस बारे में है:

1
भागीदारी का अस्तित्व निर्धारण करने की रीति
2
व्यपदेशन करने का सिद्धांत
3
अवयस्क द्वारा बालिक आयु/ वय प्राप्त करने पर विकल्प
4
किसी निष्कासित साझेदार की देनदारी

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