नीचे दिए गए परिच्छेद को पढ़िए और उत्तर दीजिए।
भारत एक बुनियादी मानव अधिकार के रूप में शिक्षा के प्रति वचनबद्ध है। इसमें आवश्यक रूप से वे मूल्य, ज्ञान और कौशल समाहित हैं जो भेदभाव रहित, प्रतिभागिता और समानता के बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित हों। इसलिए विकास के लक्ष्यों को निश्चित तौर पर एक ऐसी प्रक्रिया को सुगम बनाना चाहिए जो लड़कियों सहित सभी शिक्षार्थियों को स्वावलंबी बनाए और उन्हें उनके समुदायों में सार्थक योगदान के लिए तैयार करे। इसके लिए यह आवश्यक है कि लड़कों और लड़कियों दोनों को शिक्षा का अधिकार और अवसरों की समानता मिले ताकि उन्हें विद्यालय जाने का समान अवसर प्राप्त हो। इसे प्राप्त करने के लिए शिक्षा को निःशुल्क बनाया जाना, उपयुक्त पाठ्यक्रम बनाना, दूरी घटाना और जल तथा स्वच्छता सुविधाएँ प्रदान करना महत्त्वपूर्ण है।
राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अध्यापिकाओं की संख्या पर्याप्त हो ताकि वे लड़कियों की मदद कर सकें और उनके लिए प्रेरणा - स्रोत बन सकें। सभी शिक्षकों को सामाजिक और लैंगिक भेदभाव के मुद्दों को समझने के लिए प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। उन्हें उन नीतियों के बारे में संवेदनशील बनाया जाना चाहिए जो बच्चों को उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और लिंग आधारित हिंसा सहित हिंसा से सुरक्षा प्रदान करती है। शिक्षण में लैंगिक समानता प्राप्त करने के उद्देश्य से सरकार को भेदभावपरक क़ानूनों, रिवाज़ों, प्रथाओं और संस्थागत प्रक्रियाओं को समाप्त करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।
नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक अभिकथन (A) है और दूसरा तर्क (R) है। कथनों को पढ़िए और नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए ।
अभिकथन (A) : सिर्फ अध्यापिकाओं को सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता के मुद्दों को समर्थन देने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ।
तर्क (R) : सिर्फ अध्यापिकाएँ ही लड़कियों के समक्ष आने वाली कठिनाइयों और चुनौतियों को समझ सकती हैं।