Comprehension Passage

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और प्रश्न के उत्तर दीजिए:

तेज़ गतिसे फैलते फैशन उद्योग ने उससे भी तेज़ गति से परिवर्तनशील फैशन नामक घटनाक्रम का रूप ले लिया है जो त्वरित परिवलनशील फैशन कहलाता है। तथा सूक्ष्म अभिवृत्तियों और सोशल मीडिया के बीच के परस्पर संबंध से प्रभावित है।

इस तीव्र और उन्मत फैशन की असंधारणीय प्रकृति के चलते जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों की कमी तथा जैवविविधता के नुकसान जैसे प्रतिकूल प्रभावों का मार्ग प्रशस्त हुआ है। दुनिया के दूसरे सर्वाधिक प्रदूषक क्षेत्र माने जाने वाले फैशन उद्योग से वैश्विक उत्सर्जन के कुल प्रतिशत के 10 प्रतिशत तक कार्बन-डाय-ऑक्साइड निकलती है जो अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों और जहाजरानी से होने वाले संयुक्त उत्सर्जन से भी अधिक है। यहीं नहीं, बल्कि विश्व की जल आपूर्ति के दूसरे सबसे बड़े उपभोक्ता के रूप में भीं इसका स्थान है। व्यथित मन से कहें तो ऊन, फर और चर्म उत्पादों के उत्पादन के लिए प्रतिवर्ष वैश्विक फैशन उद्योग के भीतर दो बिलियन से अधिक पशुओं के साथ क्रूरता होती है। परिणामस्वरूप फैशन की वजह से पर्यावरण को अपूर्णीय क्षति पहुँचती है। ये विषाक्त क्ष अनेक कारकों का परिणाम है जिसमें अधिक उत्पादन, अधिक खपत, कचरा आदि शामिल हैं। इस ज्वलंत मुद्दे के आलोक में इस मल्टी बिलियन डालर वाले उद्योग ने इस विस्फोटक स्थिती से उबरने के लिए क्या उपाय किए हैं।

ज्ञात हुआ कि प्रतिवर्ष विनिर्मित 100 बिलियन गारमेंट्स में से 92 मिलियन गारमेंट्स अन्ततः जमीन में दबा दिए जाते हैं। यदि यह चिंताजनक प्रवृत्ति कायम रहती है तो विशेषज्ञों का पूर्वानुमान है कि सदी के अंत तक फैशन उद्योग से प्रतिवर्ष 134 मिलियन टन कचरा पैदा होगा। अनुमानों के अनुसार, परिधान उद्योग द्वारा 2030 तक उत्सर्जनमें 50 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की उम्मीद है। कार्बन फुटप्रिंट में यह चिंताजनक वृद्धि जलवायु परिवर्तन पर उद्योग के महत्वपूर्ण प्रभाव का उजागर करती है और फैशन सेक्टर की तत्काल आवश्यकता पर बल देती है। संतोषनीयता की खोज में, विशेषज्ञ फूड, शैवाल, सीप कचरे जैसे नवीन पर्यावरण अनुकूल सामग्रियों की खोज कर रहे हैं। इसी के साथ, वे संसाधन प्रबंधन में क्रांति लाने ओर वृत्तिय अधिवस्था को बढ़ाना देने के उद्देश्य से नवीनतम पुन:चक्रीकरण तकनीकों की भी खोज कर रहे हैं।

परिधान उद्योग द्वारा उत्पन्न वैश्विक उत्सर्जन में 2023 तक कितनी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है?

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