जननी सुरक्षा योजना (जे. एस. वाई) राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अग्रणी घटकों में से एक होने के साथ-साथ महिलाओं को संस्थानिक प्रसूति की सुविधा प्राप्त करने में समर्थ बनाने की मुख्य रणनीति है और इसके फलस्वरूप मातृ मृत्यु दर में कमी आती है। इसके पीछे तर्क यह है कि संस्थानिक प्रसूति के फलस्वरूप गर्भवती महिलाओं को कुशल प्रसूति परिचर भरोसेमंद रूप से उपलब्ध होंगे और इससे उन्हें आपातकालिक प्रसूति संबंधी देख-रेख सुविधा और अधिक सुलभ हो जाएगी और इसके फलस्वरूप मातृत्व और नवजात शिशु की मृत्युदर में कमी आएगी।
इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए परिकल्पित महत्त्वपूर्ण रणनीतियों में 25 से 40 वर्ष के आयु वर्ग की स्थानीय महिलाओं के माध्यम से गृहस्थी स्तर पर स्वास्थ्य देख-रेख की सुविधा उपलब्ध कराना शामिल है जिसे 'आशा' की संज्ञा दी जाती है। राष्ट्रीय दिशानिर्देश के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में रहनेवाली सभी गर्भवती महिलाएँ जो उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधा का उपभोग कर बच्चों को जन्म देती हैं, वे नकद अंतरण के लिए अर्धक हैं। यह रकम प्रसूति के समय अथवा प्रसूति के तत्काल बाद दिया जाता है जो दृश्यमान ( औषधि आपूर्ति, परिवहन) और अमूर्त व्यय (सह परिचर लागत व्यय, अस्पताल कर्मी को दिए गए उपहार / शुल्क, भोजन पर होनेवाला व्यय) पर खर्च करने के निमित्त होता है।
सूची-I को सूची-II सुमेलित कीजिए :
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सूची - I |
सूची - II |
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(a) |
शारीरिक |
(i) |
सह क्रियात्मक युग्म |
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(b) |
शरीर क्रियात्मक |
(ii) |
श्रवण निःशक्तता |
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(c) |
मनोवैज्ञानिक |
(iii) |
कार के घर्षण की कर्कश ध्वनि |
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(d) |
अर्थवैज्ञानिक |
(iv) |
नियत अर्थ में अंतर |
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(e) |
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(v) |
पक्षपात और दुराग्रह |
सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए: