नीचे दिये गए गद्यांश को पढ़िऐ और उसके बाद दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
लिंग-आधारित हिंसा (जी.बी.वी.) वैश्विक स्वास्ध्य, मानव आधिकार और विकास का एक मसला है, जो भूगोल, वर्ग, संस्कृति, आयु प्रजाति और धर्म के पार जाकर विश्व के प्रत्येक कोने में प्रत्येक समुदाय तथा देश को प्रभावित करता है। हिंसा की समाप्ति संबंधी संयुक्त राप्ट्र की घोषणा, 1993 के अनुच्छेद्-1 में लिंग-आधारित अत्याचार की परिभाषा दी गई है और उसे लिंग-आधारित कोई भी ऐसा कृत्य बतलाया गया है, जिसका परिणाम शारीरिक, यौन या मनोवैज्ञानिक क्षति या महिलाओं के पीड़ित होने या उसकी संभावना के रूप में सामने आता है, जिसमें इस प्रकार के कृत्यों की धमकी देना, भय दिखाना या मनमाने ढंग से स्वतंत्रता से वंचित करना सम्मिलित है - चाहे ये सर्वज्जनिक या निजी जीवन में घटित होते हों। भारत में लिगआधारित हिंसा के अनेक रूप हैं, इनमें बलात्कार सहित घरेल हिंसा और यौन-हिंसा के सार्बभौमिक तौर पर अधिक प्रचलन वाले रूपों से लेकर दहेज, 'ऑनर किलिग' (सम्मान के खातिर हत्या), एसिड से हमले, बाल यौन-अत्याचार आदि तक साम्मिलित हैं। इनके अतिरिक्त, भारत सामाजिक जीवन में असमानताओं, विस्थापन और साम्र्रदायिक हिंसा के कारण हिंसा की समस्या से जूझ रहा है। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'निर्भया फंड' की स्थापना की है। महिलाओं की एजेसी और सशक्तीकरण के बारे में गठित कार्य-समह ने पायलट आधार पर 24 घंटे काम करने वाली हेल्पलाइन के साथ वन-स्टॉप क्राइसिस सेन्टर की अनुशंसा की थी। वन-स्टॉप सेन्टर की योजना को कार्यान्वयन के लिए स्वीकृत किया गया था। इसका उद्देश्य सेवाओं की एक समेकित रेंज तक पहुंच को सुगम बनाना है, जिसमें हिंसा से प्रभावित महिलाओं को मेडिकल सहायता, पुलिस सहायता, कानृनी सहायता, मनोवेज्ञानिक परामर्श प्रदान करना भी साम्मिलित है। इस योजना के अंतर्गत यह कल्पना की गई है कि पूरे देश में एक चरणबद्ध तरीके से वन-स्टॉप सेन्टर स्थापित किए जाएंगे/पहले चरण में प्रति राज्य/यू.टी. में एक सेन्टर का अनुमोदन किया गया। इसके बाद, 2016-17 के दौरान दूसरे चरण में 150 अतिरिक्त सेन्टरों को सम्मिलित किया गया। इस प्रकार, अब्ध तक कुल 186 वन-स्टॉप सेन्टर (ओ.एस.सी) को स्वीकृत किया गया है और 12-12-2017 को इस प्रकार के 166 वन-स्टॉप सेन्टर कार्यरत हैं।