नीचे दिये गए गद्यांश- 1 को पढ़िए और उसके बाद दिए गए प्रश्नो के उत्तर दीजिए:
नवंबर, 2018 में जारी की गई 2018 की ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट (वैश्विक पोषण रिपोर्ट) के अनुसार विश्व में वृद्धिरोध (स्टन्तिंग) के बोझ की दृष्टि से भारत तीसरे स्थान पर है। यह दर्शाता है कि भारत एक बड़े कुपोषण संकट का सामना कर रहा है। वृद्धिरोध से पीड़ित बच्चों की चर्चा करते हुए कहा गया है कि इस सूची 45.6 मिलियन बच्चों के साथ भारत शीर्ष स्थान पर है, जिसके बाद नाइजीरिया ( 13.9 मिलियन) और पाकिस्तान (10.7 मिलियन) का स्थान है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण - 4 (एन.एफ.एच.एस. - 4 ) में भी इंगित किया गया है कि भारत पर विटामिन-A, आयोडिन, लैह तत्व और फोलिक अम्ल जनित सूक्ष्म पोषक पदार्थों की कमियों का अत्यंत उच्च बोझ है, जिससे रतौन्धी, घेघा (गलगंड), रक्ताल्पता और विभिन्न जन्म - दोष होते हैं।
इस सर्वेक्षण में आगे कहा गया है कि भारत में 5 वर्ष से कम आयु के 58.4 प्रतिशत बच्चों में रक्ताल्पता है, प्रजननीय उम्र समूह की 53.1 प्रतिशत महिलाओं में रक्ताल्पता है और 5 वर्ष से कम आयु के 35.7 प्रतिशत बच्चों का अल्प-भार है। भारत में बाल्यावस्था में वृद्धिरोध और मातृ एवं बाल्यवस्था में रक्ताल्पता का उच्च प्रचलन है। इनका संज्ञान और उत्पादकता पर दीर्घकालीन प्रभाव पड़ सकता है। इसका साक्ष्य है कि कुपोषण से सकल घरेलू उत्पार ( जी.डी.पी.) में 2-3 प्रतिशत की संभावित हानि हो सकती है और प्रत्येक कुपोषित व्यक्ति की आजीवन आय में 10 प्रतिशत से भी अधिक हानि की संभावना है।