Comprehension Passage

निम्नलिखित गद्यांश के सावध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें :

गोद लिए गए बच्चों के माता-पिता के रूप में प्रभावी ढंग से पालन पोषण करने के अनेक सूत्र अपने जैविक बच्चो के पालनपोषण के सूत्र से भिन्न नहीं हैं। बच्चों का सहयोग करें और उनका ध्यान रखें, बच्चों से जुड़े रहें और बच्चों के व्यवहार और उनकी गतिविधियों की निगरानी करें। अच्छे सम्प्रेषक बनें और बच्चों में आत्म नियंत्रण विकसित करने में उनकी सहायता करे। तथापि, गोद लिए गए बच्चों के माता पिता को कुछ अलग परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें गोद लेनेवाले परिवार के जीवन से जुड़ी विभिन्नताओं को पहचान कर इन विभिन्नताओं के बारे में बातचीत करने, जन्म देनेवाले परिवार के प्रति सम्मान दिखाने ओर बच्चों के स्वत्व और पहचान की खोज में उनकी सहायता करने की आवश्यकता हैं।

जब गोद लिए गए बच्चे अपने विकास के विभिन्न चरणों मे होते है. उनके माता-पिता को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है ।

शैशवावस्था : यदि माता-पिता की प्रजनन संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है या बच्चा माता-पिता की अपेक्षाओं को पूरा नहीं करता है. तो लगाव में समस्या उत्पन्न हो सकती है। परामर्शदाता भावी गोद लेने वाले माता-पिता में यथार्थपरक अपेक्षाएं विकसित करने में सहायता कर सकते हैं।

आरंभिक बाल्यावस्था : चूँकि अनेक बच्चे 4 से 6 वर्ष के होने के उपरांत यह पूछना शुरु करते हैं कि वे कहां से आए हैं, बच्चों को गोद लिए जाने की स्थिति के बारे में उनसे सामान्य तरीके से बातचीत करने का यह स्वाभाविक समय है। कुछ माता-पिता अपने बच्चों को उनको गोद लिए जाने के बारे में नहीं बताने का निर्णय लेते हैं। इस गोपनीयता से बच्चों के लिए मनोवैज्ञानिक जोखिम उत्पन्न हो सकता है यदि बच्चे को गोद लिए जाने के बारे में बाद में पता चलता है।

मध्य और पश्च बाल्यावस्था: प्राथमिक विद्यालयी वर्षों के दौरान बच्चें अपने जन्म के संबंध में अधिक रुचि दिखाना शुरु करते हैं. वे कहां से आए, उनके माता-पिता कैसे दिखते हैं और उनके माता-पिता ने उन्हें क्यों छोड़ दिया - ऐसे प्रश्न पूछ सकते हैं। जब वे और बड़े होते हैं बच्चें अपने गोद लिए जाने के बारे में मिली - जुली भावनाएं विकसित कर सकते हैं और अपने गोद लेने वाले माता-पिता के स्पष्टीकरण पर प्रश्न कर सकते हैं। गोद लेने वाले माता-पिता के लिए यह समझना आवश्यक है कि यह दुविधा सामान्य है। जीवन को अत्यधिक परिपूर्ण बनाने और बच्चे को अपनी आदर्श तस्वीर प्रस्तुत करने संबंधी माता-पिता की इच्छा से समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। अक्सर इसका परिणाम यह होता है कि गोद लिए गए बच्चे ऐसा महसूस करते हैं कि वे अपनी रोषपूर्ण भावनाएं व्यक्त नहीं कर सकते हैं या खुलकर समस्याओं पर बातचीत नहीं सकते हैं।

गोद लिए गए बच्चों के माता-पिता को कैसा होना चाहिए -

1
सहयोग करने वाला और देखभाल करनेवाला नहीं होना चाहिए।
2
अपने बच्चों के व्यवहार की निगरानी करनी चाहिए।
3
अपने बच्चों से बातचीत नहीं करनी चाहिए।
4
बच्चों को माता-पिता पर आश्रित होने देना चाहिए।

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